close
close

एक वोट की ताकत समझें! वाजपेयी की सरकार गिरी, डॉ. सीपी जोशी हारे, जर्मनी में आई हिटलर की तानाशाही – loksabha election 2024 first phase voting updates read details of rajasthan

जयपुर: लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसमें हर व्यक्ति को अपनी का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। चुने हुए प्रतिनिधि ही देश की सरकार बनाते हैं और शासन व्यवस्था को संभालते हैं। चुनाव का पर्व हर पांच साल में एक बार आता है। इस चुनाव में हर व्यक्ति को मतदान अवश्य करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति यह सोचता है कि उसके एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा। उस व्यक्ति को एक वोट की कीमत समझने के लिए देश और दुनिया में कई उदाहरण है। आपको याद होगा कि एक वोट की वजह से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी। एक वोट से जीतकर ही हिटलर नाजी दल का मुखिया बना और बाद में जर्मनी का तानाशाह बन गया था। एक वोट की कीमत के ऐसे कई उदाहरण है।

एक वोट की कीमत यहां पढ़ें

1. वाजपेयी की सरकार गिरी – वर्ष 1999 में भारत में 303 सीटों के साथ एनडीए की सरकार बनी थी। तब अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने थे। कुछ महीनों बाद ही एआईएडीएमके ने एनडीए का साथ छोड़ दिया। तब वाजपेयी सरकार को संसद में बहुमत साबित करना था। विश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के पक्ष में 269 वोट पड़े थे जबकि विपक्ष में 270 वोट पड़े। 1 वोट की वजह से केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी।

2. डॉ. सीपी जोशी 1 वोट से हारे – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी जोशी वर्ष 2008 में राजस्थान की नाथद्वारा विधानसभा सीट से महज एक वोट से चुनाव हार गए थे। उन दिनों डॉ. सीपी जोशी की मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में थे लेकिन एक वोट से चुनाव हारने की वजह से उनका सपना अधूरा रह गया। हैरानी की बात यह है कि उस चुनाव में डॉ. सीपी जोशी की मां, पत्नी और ड्राइवर मतदान नहीं कर पाए थे।

3. कर्नाटक में एआर कृष्णामूर्ती 1 वोट से हारे – वर्ष 2004 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जेडीएस के एआर कृष्णामूर्ती को 40,751 वोट मिले थे और कांग्रेस के आर ध्रुवनारायण को 40752 मिले थे। कृष्णामूर्ती महज एक वोट से विधानसभा चुनाव हार गए थे उनके ड्राइवर को छुट्टी नहीं थी और ड्राइवर वोट नहीं दे पाया था। ड्राइवर के वोट नहीं देने की वजह से कृष्णामूर्ती चुनाव हार गए।

4. मौजूदा विधायक 3 वोट से हारे – वर्ष 2018 के मिजोरम विधानसभा चुनाव में तुइवावल विधानसभा सीट पर मिजोरम नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के लालचंदामा राल्ते के सामने कांग्रेस के मौजूदा विधायक आरएल पियानमाविया ने चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में पियानमाविया सिर्फ 3 वोट से चुनाव हार गए थे।

5. एक वोट से जीत कर हिटलर बना जर्मनी का शासक – वर्ष 1921 में एडोल्फ हिटलर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स (नाज़ी) पार्टी का नेता बना। वर्ष 1923 में लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के तहत 1 वोट से जीतकर नाजी पार्टी का मुखिया बन गया। कुछ ही सालों बाद हिटलर ने जर्मनी की सत्ता पर कब्जा कर लिया। वर्ष 1933 से लेकर 1945 तक हिटलर ने जर्मनी पर शासन किया।

6. एक वोट से खत्म हुई राजशाही – वर्ष 1875 में एक वोट की वजह से फ्रांस में सत्ता का स्वरूप बदल गया। सत्ता का सिस्टम बदलने के चुनाव प्रक्रिया अपनाई गई थी। सिर्फ एक वोट की वजह से वहां राजशाही खत्म हुई और लोकतंत्र का आगाज हुआ। अगर एक वोट कम पड़ जाता तो शायद फ्रांस अब तक राजशाही शासन को ढोता रहता।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *